क्या भारतीय मीडिया पतन कीऔर अग्रसर है, क्या वह सिर्फ पैसा कमाने की मशीन बन चुका है, क्या उसे देश की सुरक्षा केसाथ खिलवार करने काअधिकार मिल गया है।पत्रकारिता केआदर्शों को कुचल कर ,खबरों के तोड़ मरोड़ कर विविध हितों में प्रस्तुतीकरण को ही वह पत्रकारिता समझने लगा है। यही नहीं अब तो चंद रुपयों के खातिर वह आतंकवाद औरअश्लीलता को बेचने में थोड़ी सी भी शर्म महसूश नहीं कर रहा। लेकिन अति तो अति है और इसका विरोध होना चाहिए वही मैंने किया जब मेरी दृष्टि हिंदुस्तान टाइम्स में छपे एक विज्ञापन पर पड़ी। मैंने इस औरअख़बार को फोन करने का प्रयास किया फिर उन्हें मेल करके अपना विरोध जताया…मैंने लिखा..
महोदय ,
अभी हाल फिलहाल में दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया में लगातार छपने वाली एकतरफा ख़बरों को लेकर मैंने उसे मंगवाना बंद कर दिया , यह सोच कर कि हिंदुस्तान टाइम्स निष्पक्ष ,पठनीय एवं भारतीय संस्कृति के मूल्यों के अनुरूप तथा पत्रकारिता के उच्चतम आदर्शों के अनुरूप होगा ,मैंने उसे अपने घर मंगवाना शुरू किया ।
मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि आज दिनांक चार अक्टूबर के एच टी सिटी ,नयी दिल्ली के प्रथम पेज के “Saavn” के विज्ञापन को देख विश्वास हो गया कि पैसे के लिए आप भी सभी मर्यादाएं लाँघ सकते हैं और देश में नग्नता,वासना के वाहक बन सकते हैं।
मुझे ऐसा नहीं लगता कि “saavn” का यह विज्ञापन जिसमें करण जौहर नाम का छुद्र इंसान कहता है ” नेहा ,तुम्हारे शरीर का कोई अंग मुझे आकर्षित नहीं करता ” आप तो महानतम संपादकों में से एक हैं, इसका अर्थ तो समझते होंगे फिर आपको जरा भी ग्लानि नहीं हुई कि जब अखबार के इस पन्ने को आपकी, हमारी और सबकी बेटी बहन पढेंगे तो क्या उन्हें अच्छा लगेगा । आप उन तक करण जौहर जैसों का सन्देश पहुंचा कर क्या सिद्ध करना चाहते हैं ?
आप कह सकते हैं कि इस इन्टरनेट के ज़माने में हर किस्म किस्म की नग्नता तक सबकी पहुँच है फिर हमने छाप दिया तो क्या बुरा किया ।
मैं आपकी बात से सहमत हूँ और मुझे भी मालूम है और आपको भी कि अंडर वीयर के नीचे सभी नंगे होते हैं तो इसका यह मतलब यह तो नहीं कि हम खुले आम नग्नता का प्रचार करें या उनके प्रचार में सहभागी हों । आपके अखबार से मुझे यह उम्मीद नहीं थी इसलिए मुझे आपके कृत्य से बहुत अधिक मानसिक आघात लगा है ।
अब आपसे निवेदन है कि आज के इस ‘saavn’ के विज्ञापन के लिए आप कल के अंक में क्षमा मांगे हालाँकि आपके क्षमा मांगने से मेरे दुःख कम नहीं हो पायंगे लेकिन यह मह्शूश जरूर होगा कि कोई तो है जो भारतीयता को बनाये रखने का पक्षधर है।
