शरीर को अलग अलग मुद्राओं में मोड़ना या असंभव लगने वाली क्रियाएं करना ही योग नहीं है। योग में व्यक्ति का मस्तिष्क और शरीर कुछ इस तरह मिलते हैं जिससे दिमागी कसरत तो होती ही है साथ ही शरीर को बिना कोई नुकसान पहुंचे अत्यंत