शौचालय से स्वच्छता, स्वच्छता से स्वास्थ्य । स्वास्थ्य से शिक्षा, शिक्षा से ज्ञान । ज्ञान से समृद्धि, समृद्धि से सुख। सुख से शांति, शांति से प्रगति। प्रगति से शक्ति, शक्ति से निर्भयता । निर्भयता से सम्मान, सम्मान से ही बनेगा हमारा देश महान ।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने ‘स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय’ अभियान के प्रारंभ किये जाने की घोषणा की है । स्वच्छ विद्यालय कार्यक्रम सर्व शिक्षा अभियान , राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान , स्वच्छ भारत कोष के लिए धन देने
राजस्थान देष में जैतून के अग्रणी उत्पादक के रूप में उभरकर सामने आया है। राजस्थान में182 हेक्टेयर सरकारी कृषि क्षेत्रों के अतिरिक्त किसानों के 425.18 हेक्टेयर खेतों में जैतुन की खेती की जा रही है। 2013 से 2016 तक राज्य में कुल 11574.09 किलोग्राम
*नीरज कुमार मिश्रा* स्वच्छ भारत यानि स्वस्थ भारत इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 कोमहात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की। तब उन्होंने देश के प्रत्येक नागरिक से अपील की थी कि इसे
नयी दिल्ली, 29 सितंबर :शहरी विकास मंत्री एम.वेंकैया नायडू ने कहा कि देश सच्चे अर्थों में तब शिक्षित होगा जब जहां-तहां कूड़ा फैलाने वाले (लिटेराती) लोगों से यह मुक्त होगा। वे राजधानी में स्वच्छता प्रोद्यौगिकी पर आयोजित दो दिवसीय प्रदर्शनी के उद्घाटन के बाद
नवदपंती अपनी शादी के पहले दिन एक पति और पत्नी आपस में ही अपने बीच एक शर्त रखते है, कि वो किसी के लिए भी अपना दरवाजा नहीं खोलेंगे चाहे जो भी हो ! उसी दिन उस लड़के के माता पिता आते हे और
रीवा जिले की जीवन रेखा कही जाने वाली बिछिया नदी बहुत बुरे दौर से गुजर रही है। आधी नदी के सूख जाने से लोगों ने उसे खेत बना डाला है जबकि बचे खुचे हिस्से पर जलकुम्भी ने कब्जा कर रखा है। विन्ध्य और कैमूर
बूंद-बूंद से सागर कैसे भरता है इसकी मिसाल बिहार के माणिकपुर गांव में देखी जा सकती है। पटना से करीब सौ किलोमीटर दूर इस गांव के कमलेश्वरी सिंह ने सात साल तक अकेले ही खुरपी और बाल्टी की मदद से 60 फीट लंबा-चौड़ा और
पानीपत : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत के लोगों ने एक भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि वो “बेटियों के जीवन की भीख मांगने के लिए एक भिक्षुक के रूप में आया हूं।” उन्होंने राष्ट्रीय कार्यक्रम “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” की शुरुआत के अवसर पर
घटते वन क्षेत्र से आज पूरी दुनिया चिंतित है। कोई ओजोन परत में छेद होने से, तो कोई जंगल में मौजूद प्रचुर जैव-विविधता के संरक्षण के लिए चिंतित है। लेकिन हजारों साल से वनों पर आश्रित आदिवासियों की चिंता इससे बिल्कुल अलग है। आदिवासी