*नीरज कुमार मिश्रा*

स्वच्छ भारत यानि स्वस्थ भारत इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 कोमहात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की। तब उन्होंने देश के प्रत्येक नागरिक से अपील की थी कि इसे जुड़कर मुहिम को सफल बनाये। आज इस मुहिम से न सिर्फ देश केबड़ी हस्तियां जुड़ रही हैं बल्कि समाज के कई वर्ग के लोग भी इस से जुड़ने लगे हैं। अभियान से जुड़ी रोचक बात यह है कि बच्चे न सिर्फ इस में अपना सहयोग कर रहे बल्कि बड़ो को भी स्वच्छता का सही पाठ पठाने में भी पीछे नहीं है। बच्चें अपने घर, गली और स्कूल्स को साफ रखने की मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे है। इस अभियान का मकसद न सिर्फ देश को साफ और स्वस्थ्य रखना है बल्कि जनता को स्वच्छता के प्रति जागरुक भी करना है। बचपन से ही हमारे मन में यह सवाल रहा है कि हमारा देश यूरोपीय देशों की भांति साफ-सूथरा कब दिखेगा? लेकिन यह तब ही संभव होगा जब हम दैनिक जीवन में साफ-सफाई के महत्व को समझेंगे। images-19स्वच्छता का हमारे जीवन में क्या और कितना महत्व है इसे इस बात से भी समझ सकते है कि हमारे देश के दक्षिणी समुद्री सीमा से सटा एक छोटा सा देश श्रीलंका है. जिसे अभी हाल में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्लूएचओं) ने मलेरिया मुक्त देश का दर्जा दिया है। मलेरिया, डेगू, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस,जीका, पीत ज्वर जैसी घातक बिमारियों के प्रकोप से हम अच्छी तरह वाकिफ है। ऐसे में हमारे पडोसी देश का मलेरिया मुक्त होना हमारे लिए भी एक रोचक और प्रेरणादायी बात है। दरअसल श्रीलंका में मलेरिया के खिलाफ जंग 12 सालों तक चला और तब जाकर उसे कामयाबी मिली. साल 1999 में वहां मलेरिया के 264549मामले सामने आए थे, लेकिन साल 2008 तक यह आकड़े सलाना हजार से भी कम हो गये। वहां मलेरिया का आखिरी मामला अक्टूबर 2012 में सामने आया था। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया। खासकर सड़कों के किनारे, पार्कों में और उन सभी स्थानों पर जहां मच्छर आसानी से पनपते हैं।

 हमारे यहां मच्छर के काटने से होने वाली बीमारियों और उससे होती मौतों की संख्या लगातार बढ़ी ही है।बरसात के मौसम में तो हर साल इन बीमारियों के मामले कई गुना बढ़ जाते हैं। एक आकडे के मुताबिक साल 2015 में अकेले चिकनगुनिया के 27553 और डेंगू के 99913 मामले सामने आए। वहीं साल 2014 में डेंगू के40571 जबकि चिकनगुनिया के 16049  मामले दर्ज किए गये थे। केंद्र सरकार ने 2030 तक मलेरिया से मुक्त होने का लक्ष्य रखा है लेकिन यह अपने तय समय से पहले पूरा हो सके इसके लिए हम सबको आगे बढकर सरकार की योजनाओं के साथ कदम बढ़ाकर काम करना होगा। अगर हमें हमारे देश को स्वच्छ करना है तो सबसे पहले अपने घर के आस-पास के इलाकों को साफ रखना होगा।adampura-slaatar-house-2

स्वच्छ भारत अभियान की कामयाबी की गारंटी का सिर्फ एक ही आयाम है और वह है सरकार के साथ ही जनता की सहभागिता। हरियाणा का एक गांव है झट्टीपुर जोन सिर्फ इस बात को बखूबी समझा है बल्कि इस पर अमल भी किया। यहां के सरपंच अशोक और गांववालों ने महज कुछ महीनों में ही गांव का कायाकल्प कर डाला। पानीपत जिले का यह गांव दिल्ली से करीब 90 किलोमीटर दूर है। गांव की सफाई का अंदाजा यहां आते ही लगाया जा सकता है। यहां के रास्तों पर कहीं कूड़ा-कचरा देखने को नहीं मिलेगा। गांव की गलियों को साफ रखने का इनका तरीका भी खास है। प्रत्येक गली या सड़क के लिए एक अलग सफाईकर्मी है। इतना ही नहीं गली की दीवार में बने बोर्ड पर सफाईकर्मी का नाम, फोन नंबर और सफाई का समय लिखा है. इन सब के बाद भी अगर आपको इस गांव में कही पर गंदगी या कचरा दिखता है तो इसकी शिकायत सरपंच से कर सकते है। गांववालों ने सफाई के काम को सिर्फ सरकार के उपर नहीं छोडा बल्कि खुद भी झाड़ू लेकर सड़क पर उतरने में शर्म महसूस नहीं करते। इस गांव के उन घरों में जहां शौचालय नहीं था, वहां गांव के लोगो ने आपस में चंदा कर के शौचालय बना दिया। पानीपत के इस गांव में एक ओर जहां वाई-फाई की सुविधा है, वहीं गलियों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। अगर देश का हर गांव इसे अपनी प्रेरणा मान ले तो स्वच्छ भारत के हमारे सपनों को पूरा होने से कोई नहीं रोक सकता है। download-5सफाई के मद्देनजर अगर दक्षिण भारत की बात करे तो उत्तर भारत से यहां की स्थिति थोडी बेहतर है.इसका पहला कारण तो वहां के लोगों में सफाई के प्रति उनकी जागरूकता है. साथ ही दक्षिण के स्थानीय निकाय भी इस बात पर ज्यादा जोर देते है कि शहर को साफ-सूथरा कैसे रखा जाये। शहरी इलाकों को साफ रखने में बडी चुनौति कचरे का जमा होकर मलबा बनना और सही निराकरण है। साथ ही लोगों का सार्वजनिक जगहों पर कचरा फेकने की आदत में अभी ज्यादा परिर्वतन नहीं आया है। इस दिशा में सरकार को कुछ और ठोस कदम उठाने की जरूरत है। जो इलेक्ट्रानिक और प्लास्टिक का कचरा फेकते है उन पर सख्ती से कार्रवाई करने की जरूरत है। कभी ग्रीन और क्लीन सिटी के नाम से प्रसिद्ध जमशेदपुर आज कचरे का सही निस्तारण न होने के कारण अपनी स्वच्छ शहर की पहचान को खोता जा रहा है। कुछ इलाकों को छोडकर शहर के शेष एरिया जैसे, मानगो, जमशेदपुर अक्षेस और जुगसलाई नगरपालिका क्षेत्र में कचरा डिस्पोजल का कोई खास इंतजाम नहीं है। देश के ज्यादातर राज्यों में कचरे को उठाने के बाद उसे डंपकर दिया जाता है। जबकि इसके निस्तारण या रिसाइक्लिंग की आवश्कता है। जिस कारण शहर के कई स्थानों पर कचरे का पहाड़ बन जाता है। इससे आस-पास  के इलाकों में रहने वाले लोगों को कई खतरनाक बीमारियों से जुझना पड़ता है। कई जगह तो नियमों को ताक पर रख इन डंपिंग कचरों में आग लगा दी जाती है। इन कचरों को जलाने से कार्बन मोनोआक्साइड जैसी जहरीली गैस निकलती है, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक है। जबकि कचरे का सही निस्तारण किया जाए तो इसके कई फायदे हमें मिल सकते है। शहरी इलाकों से जैविक व अजैविक दोनों तरह के कचरे निकलते है। जैविक कचरे से खाद बनाया जा सकता है जबकि अजैविक कचरे को रिसाइकलिंग कर ऊर्जा का निर्माण किया जा सकता है। बस जरूरत है प्रबल इच्छा शक्ति की। अभी हाल ही में स्वच्छता मंत्रालय द्वारा क्वॉलिटी काउंसिल आफ इंडिया के सर्वे के अनुसार हिमाचल प्रदेश का मंड़ी सब से साफ-सुथरा जिला है। जबकि दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र का सिंधु दुर्ग है। देश के ग्रामीण इलाकों में हुए इस सर्वे में 75 सबसे साफ-सूथरे जिलों को शामिल किया गया है। इस सर्वेक्षण में कुल 2530 गांवों के करीब 70,000 घरों को शामिल किया गया था। सर्वेक्षण के मुताबिक दस सबसे स्वच्छ जिलों में महाराष्ट्र से कोल्हापुर, रत्नागिरि, सतारा, और ठाणे, बंगाल से हुगली,नदिया, मिदनापुर पूर्व और, कर्नाटक से उडुपी तथा राजस्थान से चुरु आदि शामिल हैं।  जबकि उत्तर प्रदेश,बिहार और ओडिसा के जिले साफ-सफाई के मामले में काफी पीछे है। download-6स्वच्छता अभियान का अगला पहलू स्वच्छ पेयजल है। जिसकी समस्या ग्रामीण और शहरी दोनों ही इलाकों में है। मानव जीवन के लिए शुद्ध और साफ जल आवश्यक है। गंदा और अनावश्यक मात्रा में लवणों से युक्त पानी कई रोगों को जन्म देता है। ज्यादातर बीमारियों का सीधा या परोक्ष कारण दूषित पानी ही रहता है। विश्व भर में प्रतिघंटे एक हजार बच्चों की मृत्यु केवल अतिसार के कारण ही होती है जो दूषित जल के कारण होता है। पानी को पीने लायक बनाने के लिए आवश्यक है पानी को पीने से पहले हम यह जान ले कि यह पीने लायक है या नहीं। अगर इसे लेकर शक हो तो पानी को स्वच्छ कपड़े से छान लेना चाहिए या फिल्टर का प्रयोग करना चाहिए। ग्रामीण इलाकों में कुएं के पानी को स्वच्छ और कीटाणु मुक्त करने के लिए उचित मात्रा में ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल कर सकते है। साथ ही बीच-बीच में लाल दवा डालना चाहिए। पानी अगर ज्यादा गंदा हो तो उसे पीने से पहले उबाल लें, फिर ठंडा कर इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावे ग्रामीण इलाकों में दूषित पानी को स्वच्छ करने के लिए फिटकरी, ब्लीचिंग पाउडर,चारकोल आदि का भी इस्तेमाल कर सकते है। पानी को स्वच्छ रखने के लिए आवश्यक है किकल-कारखानें और मवेशियों को घने आबादी वाले इलाके से दूर ही रखा जाये। जानवरों के लिए अलग टैंक और तालाब की व्यवस्था हो। साथ ही हमारी प्राकृतिक धरोहरों जैसे नदियों, झरनों और नहरों को साफ रखने का प्रयास करे। images-18

स्वच्छता एक ऐसी आदत है जिसे जब तक हम अपने दैनिक जीवन में न लाए, तब तक हम साफ-सफाई के प्रति जागरूक हो ही नहीं सकते। इसलिए अगर हमें हमारे देश को भी स्वच्छ, स्वास्थ्य और सुंदर बनाना है तो हमें सबसे पहले हमारे अंदर स्वच्छ रहने की आदत डालनी ही होगी। अगर हमारा घर, गली, मुहल्ला,स्कूल, पार्क, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन व अस्पताल आदि साफ रहेगा तभी हमारा देश भी स्वच्छ बनेगा।