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आ.वेद्भूषण शर्मा कृष्णात्रि

इस वर्ष माँ दुर्गा का वाहन घोड़ा,अभिजित मुहूर्त और द्विस्वभाव लग्न से सर्वार्थसिद्ध। शरद ऋतु के आश्विन माह में आने वाले शारदीय नवरात्र का 1 अक्टूबर से शुभारंभ होगा। इस बार नवरात्र का एक दिन बढ़ गया है। शास्त्रों में 10 दिन के नवरात्र शक्ति उपासना के लिए अत्यंत ही शुभ माने गए हैं। इस वर्ष मां दुर्गा का वाहन तुरंग (घोड़ा) है। इसके साथ ही इस बार नवरात्र में आठ दिन राजयोग, द्विपुष्कर योग, सिद्धियोग, सर्वार्थसिद्धि योग, सिद्धियोग और अमृत योग के संयोग बन रहे हैं। इन विशेष योगों में की गई खरीदारी अत्यधिक शुभ और फलदायी रहती है। दस में से 8 दिन रहेंगे विशेष योग नवरात्र के दौरान 10 दिन में से 8 दिन विशेष योग बन रहे हैं। इनका महत्व नवरात्र के शुभ दिनों में आने से अत्यंत बढ़ गया है। इन दिनों में राजयोग, द्विपुष्कर योग, सिद्धियोग, सर्वार्थसिद्धि योग, सिद्धियोग और अमृत योग का संयोग बन रहा है। इन विशेष योगों में की गई खरीदारी अत्यधिक शुभ और फलदायी रहती है।

घट स्थापना मुहूर्त

सुबह 7:51 से 9:19 तक शुभ का चौघड़िया

दोपहर 12:16 से 1:44 तक चर का चौघड़िया

अभिजीत मुहूर्त 12:25 से 01:44 तक

अभिजीत मुहूर्त 12:25 से 01:44 तक

अभिजीत मुहूर्त धनु लग्न में पड़ रहा है। ऐसे में धनु लग्न में कलश स्थापना श्रेष्ठ होगा। प्रतिपदा वृद्धि होने से देश में खुशहाली के संकेत हैं। अष्टमी पूजन 9 अक्टूबर को होगा। नवमी पूजन 10 और दशहरा 11 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

नवरात्रि कलश (घट) स्थापना कैसे करें, जरूर ध्यान रखें ये बातें ।

नवरात्र की 9 देवियां हमारी परंपरा एवं आध्यात्मिक संस्कृति के साथ जुड़ी हुई हैं। जानिए कलश स्थापना के समय ध्यान रखने योग्य 9 बातें:

1 . देवी को लाल रंग के वस्त्र, रोली, लाल चंदन, सिन्दूर, लाल साड़ी, लाल चुनरी, आभूषण तथा खाने-पीने के सभी पदार्थ जो लाल रंग के होते हैं, वही अर्पित किए जाते हैं।

2 .माता का आशीर्वाद पाने के लिए नवरात्रों के दौरान रोज ही इस श्लोक की स्तुति करना शुभ होता है-

या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

3. इस मंत्र के साथ नवरात्र के पहले दिन अपराह्न में घटस्थापन यानी पूजा स्थल में तांबे या मिट्टी का कलश स्थापन किया जाता है, जो लगातार 9 दिनों तक एक ही स्थान पर रखा जाता है।

4. घटस्थापना के लिए दुर्गाजी की स्वर्ण अथवा चांदी की मूर्ति या ताम्र मूर्ति उत्तम है। अगर ये भी उपलब्ध न हो सके तो मिट्टी की मूर्ति अवश्य होनी चाहिए जिसको रंग आदि से चित्रित किया गया हो।

5. घटस्थापन हेतु गंगाजल, नारियल, लाल कपड़ा, मौली, रोली, चंदन, पान, सुपारी, धूपबत्ती, घी का दीपक, ताजे फल, फल माला, बेलपत्रों की माला, एक थाली में साफ चावल रखें।

6. घटस्थापन के स्थान पर केले का खंभा, घर के दरवाजे पर बंदनवार के लिए आम के पत्ते, तांबे या मिट्टी का एक घड़ा, चंदन की लकड़ी, हल्दी की गांठ, 5 प्रकार के रत्न रखें। दिव्य आभूषण देवी को स्नान के उपरांत पहनाने चाहिए।

7. देवी की मूर्ति के अनुसार लाल कपड़े, मिठाई, बताशा, सुगंधित तेल, सिन्दूर, कंघा, दर्पण, आरती के लिए कपूर, 5 प्रकार के फल, पंचामृत (जिसमें दूध, दही शहद चीनी और गंगाजल हो), साथ ही पंचगव्य (जिसमें गाय का गोबर, गाय का मूत्र, गाय का दूध, गाय का दही, गाय का घी) पूजा सामग्री में रखना आवश्यक है।

8. घटस्थापन के दिन ही जौ, तिल और नवान्न बीजों को बीजनी यानी एक मिट्टी की परात में हरेला भी बोया जाता है, जो मां पार्वती यानी शैलपुत्री को अन्नपूर्णास्वरूप पूजने के विधान से जुड़ा है। अष्टमी अथवा नवमी को इसको काटा जाता है। केसर के लेप के बाद सबके सिर पर रखा जाता है।

9. नवदुर्गाओं को लाल वस्त्र, आभूषण और नैवेद्य प्रिय हैं अत: उनको पहनाने के लिए रोज नए रंगीन रेशम आदि के वस्त्र आभूषण, गले का हार, हाथ की चूड़ियां, कंगन, मांग टीका, नथ और कर्णफूल आदि अवश्य रखें। यह सभी सामग्री 9 दिन नवदुर्गाओं को पूजा के दौरान समर्पित की जानी चाहिए।

नवरात्री विशेष भोग सामग्री

नवरात्र की प्रथमा को देवी के चरणों में गाय का शुद्ध घी अर्पित करने से आरोग्य का वरदान मिलता है जिससे शरीर निरोगी रहता है।
द्वितीया को मां को शक्कर का भोग लगाकर घर में सभी सदस्यों को यह प्रसाद दें। इससे लम्बी आयु का आशीर्वीद मिलता है।
नवरात्र की चतुर्थी को देवी को मालपुए का भोग लगाएं और मंदिर के ब्राह्मण को दान करें। इससे बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय शक्ति बढ़ती है।
नवरात्र की नवमी तिथि को माता रानी को तिल का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान दें। इससे मृत्यु भय से राहत मिलेगी। साथ ही किसी अनहोनी से भी रक्षा होगी।
नवरात्र के तीसरे दिन दूध या दूध से बनी मिठाई, खीर आदि का भोग मां को लगाकर मंदिर के ब्राह्मण को दान करें। इससे आपको दुखों से मुक्ति मिलेगी और परमानंद की प्राप्ति होगी
आठवीं नवरात्र को मां को नारियल चढ़ाकर नारियल का दान कर दें। इससे संतान सम्बंधी परेशानियों से छुटकारा मिलेगा।